🪔 तेनाली रामा की कहानियाँ

एपिसोड T03

चोर और कुआँ — लालच हमेशा अपना ही जाल खोदता है

🪔
विजयनगर राज्य
तेनाली रामा
तीन चोर
తెలుగుEnglishहिन्दी
📖 पढ़ने का समय: ~6 मिनट 👶 आयु: 8+ 📂 सीरीज़: तेनाली की कहानियाँ ✍️ प्रस्तुति: RayalSabha 📅 प्रकाशित: जून 2026
🪔 इस कहानी के बारे में

इस कहानी में तेनाली रामकृष्ण चोरों के ही लालच को उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल करके मुफ़्त में अपना बाग़ सिंचवा लेते हैं! तीन चोर — चालाक वीरन्ना, भोला पोतु और डरपोक टिक्का — रात में तेनाली के घर चोरी करने आए। पर तेनाली पहले से तैयार थे। पत्थरों से भरा संदूक, एक कुआँ और एक शानदार नाटक — और चोर रात भर उनका बाग़ सींचते रह गए!

01

विजयनगर का बाज़ार — तीन चोरों की योजना

शाम
विजयनगर का बाज़ार — तीन चोरों की योजना — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

"विजयनगर में तीन चोर — एक चालाक (वीरन्ना), एक मोटा और भोला (पोतु), और एक जो बस डरा ही रहता था (टिक्का)!"

वीरन्ना
"सुनो! कहते हैं राजा के मंत्री तेनाली ने अपने घर में सोने के गहने और हज़ारों वराह छिपा रखे हैं!"
पोतुराजु
"सच में, भैया?! कितना होगा?!"
वीरन्ना
"ढेर सारा! आज रात चलते हैं — हम लखपति बन जाएँगे!"
टिक्कन्ना
"पर भैया… सुना है मंत्री बहुत चालाक है—"
वीरन्ना
"आधी रात को चालाकी नहीं — सिर्फ़ नींद काम करती है!"
पोतुराजु
"ठीक है भैया! मैं तैयार हूँ!"
टिक्कन्ना
"मुझे डर लग रहा है, भैया…"
02

तेनाली का घर — पत्थरों का संदूक

रात
तेनाली का घर — पत्थरों का संदूक — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

तेनाली फ़र्श पर बैठकर एक बड़े संदूक में पत्थर भर रहे थे। शारदा आईं और हैरानी से देखने लगीं।

शारदा
"यह क्या है? संदूक में पत्थर क्यों भर रहे हो?"
पंडित-मंत्री — तेनाली
"बेवजह नहीं, शारदा… आज रात मुझे अपना बाग़ सिंचवाना है!"
शारदा
"तुम क्या कह रहे हो, मेरी समझ में नहीं आ रहा!"
पंडित-मंत्री — तेनाली
"समझ जाओगी, शारदा… बहुत जल्द सब समझ आ जाएगा!"
03

दीवार पर — चोरों की घुसपैठ

आधी रात
दीवार पर — चोरों की घुसपैठ — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

आधी रात। तीन परछाइयाँ अहाते की दीवार की ओर सरकीं।

वीरन्ना
"ठीक है! पहले मैं कूदूँगा — तुम पीछे-पीछे आना!"

वीरन्ना अंदर कूद गया। पोतु उलटी तरफ़ कूदा — और सीधा फिर बाहर आ गिरा!

पोतुराजु
"भैया… मैं तो फिर बाहर आ गया!"
वीरन्ना
"मैंने कहा था बाईं ओर कूदना!"
पोतुराजु
"मुझे नहीं पता कौन-सा बायाँ है और कौन-सा दायाँ, भैया!"
वीरन्ना
"हे भगवान…"
टिक्कन्ना
"भैया… कहते हैं उस घर में भूत हैं—"
वीरन्ना
"भूतों को सोना चाहिए क्या?! चुप रहो!"
04

तेनाली का नाटक — चोर जाल में फँसे!

रात — घर के अंदर
तेनाली का नाटक — चोर जाल में फँसे! — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

"दीवार के बाहर फुसफुसाहट सुनते ही मंत्री तुरंत समझ गए — चोर सीधे उनके जाल में आ पहुँचे हैं!"

पंडित-मंत्री — तेनाली (ज़ोर से, नाटकीय ढंग से)
"शारदा! सुना है शहर में चोर घूम रहे हैं! चलो, अपने सारे गहने और वराह उस बड़े संदूक में रखकर कुएँ में उतार दें — वहाँ कोई नहीं पहुँच सकता!"

बाग़ में चोरों के कान खड़े हो गए!

शारदा (फुसफुसाते हुए)
"कुएँ में?! तुम क्या—"
पंडित-मंत्री — तेनाली (आँख मारकर फुसफुसाते हुए)
"चुप, शारदा — मैं नाटक कर रहा हूँ!"
सपनों का दृश्य

"मंत्री की बात सुनते ही — तीनों चोर एक साथ सपने देखने लगे!"

वीरन्ना (सपने में) 👑
"सोने के गहने… वराह… मैं महाराजा बन जाऊँगा!"
पोतुराजु (सपने में) 😄
"सोना… शायद सोने के लड्डू भी हों!"
टिक्कन्ना (सपने में) 😱
"अगर संदूक खोला… और उसमें भूत निकला तो?!"
वीरन्ना
"किस बारे में सोच रहे हो?"
पोतुराजु (मुँह में पानी भरकर)
"सोने के लड्डू, भैया!"
वीरन्ना (माथा पीटते हुए)
"हे भगवान…"
05

कुएँ पर कॉमेडी — टिक्का को दिखा भूत!

आधी रात
कुएँ पर कॉमेडी — टिक्का को दिखा भूत! — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

तीनों चोर कुएँ की ओर दौड़े।

वीरन्ना
"संदूक कुएँ में है! निकालना होगा! मैं नीचे उतरता हूँ!"
टिक्कन्ना (कुएँ में झाँकते हुए, काँपते हुए)
"भैया… अंदर अँधेरा है… भूत—"

टिक्का ने कुएँ में झाँका — उसे भूत दिखा (अपनी ही परछाईं)! वह भाग खड़ा हुआ!

वीरन्ना
"भूतों को तैरना आता है क्या?!"

वीरन्ना ख़ुद नीचे उतरा — और भीगकर ऊपर आया।

पोतुराजु
"ठीक हो, भैया?!"
वीरन्ना (भीगा हुआ और ग़ुस्से में)
"संदूक कुएँ में नहीं दिख रहा! पानी निकालो! संदूक दिख जाएगा!"
06

पानी खींचना — बाग़ की सिंचाई!

आधी रात
पानी खींचना — बाग़ की सिंचाई! — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

"एक पानी खींचता… एक बार-बार फिसलकर गिरता… और तीसरा पीछे मुड़-मुड़कर देखता कि कहीं भूत तो नहीं आ रहे!"

07

संदूक खुला — अंदर सिर्फ़ पत्थर!

आधी रात
संदूक खुला — अंदर सिर्फ़ पत्थर! — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य
वीरन्ना
"मिल गया! खोलो इसे!"

उन्होंने संदूक खोला — अंदर सिर्फ़ पत्थर! 🪨

टिक्कन्ना (गालों पर हाथ रखकर)
"अरे नहीं!"
पोतुराजु (पत्थर उठाकर)
"भैया… यह बहुत भारी है… ज़रूर कीमती होगा!"
वीरन्ना
"वह पत्थर है!"
पोतुराजु (भोलेपन से)
"अच्छा! इसीलिए इतना भारी है?!"
वीरन्ना (सिर पकड़कर)
"हमें बेवकूफ़ बनाया गया!"
08

तेनाली ने दरवाज़ा खोला — चोर पकड़े गए!

भोर
तेनाली ने दरवाज़ा खोला — चोर पकड़े गए! — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य

भोर होते ही तेनाली ने दरवाज़ा खोला। बाहर तीन चोर — थके, भीगे, कीचड़ में सने। सिपाहियों ने उन्हें घेर रखा था।

पंडित-मंत्री — तेनाली (हँसते हुए)
"अरे! तुमने रात भर हमारा बाग़ सींचा? तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद!"
वीरन्ना
"मंत्री जी! हमें माफ़ी माँगने का एक मौक़ा दीजिए!"
पंडित-मंत्री — तेनाली
"माफ़ी क्यों? तुमने बाग़ सींचने में मेहनत की — मुझे तो तुम्हें मज़दूरी देनी चाहिए!"
पोतुराजु (सिपाहियों के बीच से, भोलेपन से)
"भैया… क्या ये सच में मज़दूरी देंगे?"
वीरन्ना (आँखें बंद करके)
"तुम्हारी वजह से हम पकड़े गए!"
पोतुराजु (भोलेपन से)
"मैंने क्या किया, भैया?!"
09

अंत — तेनाली की मास्टर प्लान का खुलासा

भोर
अंत — तेनाली की मास्टर प्लान का खुलासा — तेनाली रामा की कहानी का दृश्य
शारदा
"क्या तुम्हें पहले से पता था कि वे आएँगे?"
पंडित-मंत्री — तेनाली
"मैंने बाज़ार में अपनी दौलत की कानाफूसी सुनी थी, शारदा — मैं जानता था कि बात चोरों के कानों तक पहुँचेगी!"
शारदा
"पर संदूक में पत्थर क्यों भरे?"
तेनाली की मास्टर प्लान
बाज़ार में अफ़वाह फैलाई — बात चोरों तक पहुँची
संदूक में पत्थर भरे — लालची को पत्थर भी सोना दिखता है
चोरों ने बाग़ सींच दिया — बिलकुल मुफ़्त!
पंडित-मंत्री — तेनाली (हँसते हुए)
"लालची को पत्थर भी सोना दिखता है, शारदा! संदूक पाने के लिए उन्होंने पानी खींचा — मेरा बाग़ सींच दिया — और मेरा एक पैसा भी ख़र्च नहीं हुआ!"
🪔 कहानी की सीख

लालची को मात देने के लिए बड़ी चतुराई की ज़रूरत नहीं —
उसका अपना लालच ही काफ़ी है।

🌿 जीवन का पाठ

एक पैसा ख़र्च किए बिना और तुरंत सिपाही बुलाए बिना, तेनाली ने चोरों से अपना ही काम करवा लिया। जीवन में कई बार दुश्मन की कमज़ोरी ही आपका सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। चतुर व्यक्ति सीधे नहीं लड़ता — वह हालात को अपने पक्ष में मोड़ लेता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कहानी के बारे में कोई सवाल?

चोर और कुआँ कहानी की सीख क्या है?
+

लालची को मात देने के लिए बड़ी चतुराई की ज़रूरत नहीं — उसका अपना लालच ही काफ़ी है! तेनाली चोरों से लड़े नहीं — उन्होंने उनके लालच को ही उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया।

तेनाली ने चोरों को कैसे पकड़ा?
+

तीन क़दम की रणनीति: (1) बाज़ार में अपनी दौलत की अफ़वाह फैलाई (2) संदूक में पत्थर भरे (3) ऐसा नाटक किया कि चोर सुन लें कि वे "संदूक कुएँ में उतार रहे हैं।" चोर रात भर पानी खींचते रहे, बाग़ सींच दिया — और भोर में पकड़े गए।

तीन चोर कौन हैं?
+

वीरन्ना (सरदार, चालाक), पोतु (भोला, मोटा — हमेशा खाने के बारे में सोचता), टिक्का (डरपोक — हमेशा भूतों से डरता)। इनकी मज़ेदार तिकड़ी इस कहानी को और ख़ास बनाती है!

क्या यह कहानी बच्चों के लिए सही है?
+

हाँ! यह कहानी 8+ उम्र के बच्चों के लिए एकदम सही है। पोतु के सोने के लड्डू और टिक्का के भूत बच्चों को खूब हँसाएँगे। साथ ही वे लालच के ख़तरों का असली सबक भी सीखेंगे!

तेनाली ने असल में कुएँ में क्या डाला?
+

तेनाली ने कुएँ में कुछ भी नहीं डाला! उन्होंने संदूक में पत्थर भरे और "उसे कुएँ में उतारने" का नाटक किया। चोरों ने संदूक के लिए पानी खींचा — पर संदूक कभी कुएँ की तलहटी में था ही नहीं!

यह वीडियो तेलुगु में है (अंग्रेज़ी सबटाइटल के साथ)।

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