दूर देश का जादूगर
एक दिन दूर देश से एक महान जादूगर राजदरबार में आया। कंधे पर कपड़े का थैला लटकाए, उसने राजा को झुककर प्रणाम किया।
उसने अपना डंडा घुमाया — और ख़ाली हवा से चमेली के फूलों की बारिश होने लगी! दरबारी हैरानी से देखते रह गए।
जादूगर ने राजा को फिर से प्रणाम किया — और मंत्रियों की कतार की ओर तिरस्कार भरी नज़र डाली।
सिर की बाज़ी
दरबार के बीच खड़े होकर जादूगर ने चारों ओर उँगली दिखाते हुए घमंड से चुनौती दी।
पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। मंत्रियों ने सिर झुका लिए। सिर्फ़ एक कवि आगे आया — पर वह जीतेगा कैसे? किसी को नहीं पता था।
जादूगर सिर पीछे करके ज़ोर से हँस पड़ा — मानो कह रहा हो, बस इतना ही?
अग्निवर्ण तंडुल चूर्ण
सिपाही उलझन में देखता रह गया — ऐसा नाम उसने कभी नहीं सुना था। रामकृष्ण उसके कान के पास झुके, हाथ की ओट करके कुछ फुसफुसाया। सिपाही का चेहरा खिल उठा; उसने सिर हिलाया और दौड़कर चला गया।
थोड़ी देर बाद चमकीले लाल पाउडर से भरा पीतल का एक कटोरा दरबार के बीच लाया गया।
आँखें बंद करके…
रामकृष्ण दरबार के बीच पालथी मारकर बैठ गए। उन्होंने आँखें कसकर बंद कीं और उँगलियों के सिरों से वह पाउडर बंद पलकों पर लगा लिया। दरबारी सहम गए — एक मंत्री ने तो अपनी ही आँखें ढक लीं!
फिर उन्होंने सफ़ेद कपड़े से धीरे-धीरे चेहरा पोंछा और मुस्कुराते हुए आँखें खोल दीं।
⚠ यह सिर्फ़ एक कहानी है — घर पर इसे कभी न आज़माएँ।
जादूगर की हार
जादूगर ने आँखें फाड़कर एक चुटकी पाउडर उठाया… पर उसका हाथ वहीं रुक गया। चुपचाप उसने वह वापस कटोरे में डाल दिया।
जैसे ही वह कटोरे के पास झुका — आछीं! आछीं! आछीं! — उसे तीन बार छींक आई। लाल पाउडर का बादल ऊपर उठा और पूरा दरबार ठहाकों से गूँज उठा।
असली जादू
राजा की आँखें ख़ुशी और हैरानी से फैल गईं। उन्होंने कटोरे को देखा, फिर रामकृष्ण को — और सिंहासन का हत्था थपथपाते हुए ठहाका मारकर हँस पड़े।
जादूगर ने पाउडर को उँगलियों में मसलकर सूँघा… फिर धीरे से ख़ुद पर ही मुस्कुरा दिया।
⚠ बच्चो, यह सिर्फ़ एक कहानी है। आँखों में कभी कोई पाउडर मत लगाना!
डींग मारने वाले से ज़्यादा, सोचकर बोलने वाला ही सच्चा बुद्धिमान है।
किसी रंग या बड़े-बड़े नाम से मत डरिए — पहले पूछिए कि वह असल में क्या है। घमंड से चुनौती देने वाले पर शांत सोचने वाला ही जीतता है। और सच्ची महानता हारे हुए को अपमानित करने में नहीं, उसे उठाने में है।
डींग मारने वाले से ज़्यादा, सोचकर बोलने वाला ही सच्चा बुद्धिमान है। शांत सोच, घमंडी चुनौतियों से बड़ी ताक़त है।
अग्निवर्ण यानी आग जैसा लाल रंग, तंडुल यानी चावल और चूर्ण यानी पाउडर या आटा — यानी बस लाल रंग का चावल का आटा! भारी-भरकम नाम और चटक लाल रंग देखकर सबने सोचा कि यह कोई तीखी चीज़ है।
वह लाल पाउडर को देखकर ही डर गया। उसने यह पूछे बिना ही हार मान ली कि वह असल में क्या है। रामकृष्ण जादू से नहीं, शब्दों और साफ़ सोच से जीते।
हाँ — 6 साल और उससे बड़े बच्चों को यह बहुत पसंद आएगी। पर यह सिर्फ़ एक कहानी है: बच्चों को ज़रूर बताइए कि आँखों में कभी कोई पाउडर न लगाएँ।
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